मणिमहेश यात्रा
*यात्रा मणिमहेश कैलास* भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है, 'पर्वतों में मैं हिमालय हूँ।'' यही वजह है कि हिंदू धर्म में हिमालय पर्वत को विशेष स्थान प्राप्त है।वृहत संहिता में तीर्थ का बड़े ही सुंदर शब्दों में वर्णन किया गया है। इसके अनुसार, "ईश्वर वहीं क्रीड़ा करते हैं जहाँ झीलों की गोद में कमल खिलते हों और सूर्य की किरणें उसके पत्तों के बीच से झाँकती हो, जहाँ हंस कमल के फूलों के बीच क्रीड़ा करते हों...जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य की अद्भुत छटा बिखरी पड़ी हो।' हिमालय पर्वत का दृश्य इससे भिन्न नहीं है। पद्मपुराण में मणिकूट कैलास दर्शन का महत्व वर्णित है।जुलाई-अगस्त के दौरान पवित्र मणिमहेश झीलके लिए तीर्थयात्री जाना शुरू हो जाते हैं। यहीं पर 15 दिनों तक मेला जन्माष्टमी के दिन से शुरू होकर राधाष्टमी के दिन समाप्त होता है। पंच कैलासों की यात्रा का अवसर जीवन में सौभाग्यशाली लोगों को ही मिलता है। मन में कैलास यात्रा का सपना था जो शिव कृपा से ही पूरा हो सकता था। पंच कैलास में से एक मणिमहेश कैलास की यात्रा का विचार माह जून 2023 से कुछ बंधुओं के साथ साझा ...