सत्य

 एक दिन छाया ने मनुष्य से कहा, ' लो देखो, तुम जितने थे, उतने ही रहे और मैं तुमसे क ई गुना बढ़ गई।'

यह सुनकर मनुष्य मुसकराया और बोला, ' सत्य और असत्य में यही तो अंतर है । सत्य जितना है, उतना ही रहता है, जबकि असत्य पल-पल में घटता-बढ़ता रहता है।'

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