सत्य
एक दिन छाया ने मनुष्य से कहा, ' लो देखो, तुम जितने थे, उतने ही रहे और मैं तुमसे क ई गुना बढ़ गई।'
यह सुनकर मनुष्य मुसकराया और बोला, ' सत्य और असत्य में यही तो अंतर है । सत्य जितना है, उतना ही रहता है, जबकि असत्य पल-पल में घटता-बढ़ता रहता है।'
एक दिन छाया ने मनुष्य से कहा, ' लो देखो, तुम जितने थे, उतने ही रहे और मैं तुमसे क ई गुना बढ़ गई।'
यह सुनकर मनुष्य मुसकराया और बोला, ' सत्य और असत्य में यही तो अंतर है । सत्य जितना है, उतना ही रहता है, जबकि असत्य पल-पल में घटता-बढ़ता रहता है।'
Good
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लगा पढ़कर शायद आपका पहला ब्लॉग।
जवाब देंहटाएंIt's true
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